हमारी मनोदशा और विचार बदलने की गति

मानवीय मनोदशा बड़ी विचित्र और अबूझ है । प्रथम पल जो कुछ सोचता है, परिस्थिति बदलते ही बिना पल गवाएँ मनोदशा बदल जाती है । यहाँ तक कि अगर सामने वाले व्यक्ति का व्यवहार हमारे प्रति सापेक्ष है तो हमारे दिल में उसके प्रति एक कोमल भावना घर कर लेती है, मगर इसी व्यक्ति का व्यवहार यदि अपने प्रति उदार नहीं महसूस होता, या किसी मजबूरीवश इंशान हमारे भावनाओं का ध्यान नहीं रख पता तो इसका तत्काल असर हमारे मनोदशा पर पड़ता है और सामने वाले के प्रति हमारी भावनायें रूखी या मैली हो जाती है ।

हमारी मनोदशा और विचार बदलने की गति
हमारी मनोदशा और विचार बदलने की गति

मनोविज्ञान को भली भाँति जानने और समझने वाले इंसान को सफल होने के चांसेज ज़्यादा होते हैं। कारण की वो सामने वाले व्यक्ति को समझने में कम गलती करता है, बजाय उनके जिन्हें मनोविज्ञान की जानकारी कम है।

मनोविज्ञान पर विभिन्न शोध ये बताते है कि मन की गति, ग़ुस्सा, प्यार, चिढ़चिढ़ापन, अत्यधिक नींद आदि मनोदशा के विभिन्न रूप हैं और इसे ज़रूरत के मतविक ढाला या बनाया जा सकता है।  

मानवीय मनोदशा बड़ी विचित्र और अबूझ है । प्रथम पल जो कुछ सोचता है, परिस्थिति बदलते ही बिना पल गवाएँ मनोदशा बदल जाती है  । यहाँ तक कि अगर सामने वाले व्यक्ति का व्यवहार हमारे प्रति सापेक्ष है तो हमारे दिल में उसके प्रति एक कोमल भावना घर कर लेती है, मगर इसी व्यक्ति का व्यवहार यदि अपने प्रति उदार नहीं महसूस होता, या किसी मजबूरीवश इंशान हमारे भावनाओं का ध्यान नहीं रख पता तो इसका तत्काल असर हमारे मनोदशा पर पड़ता है और सामने वाले के प्रति हमारी भावनायें रूखी या मैली हो जाती है ।

मन की मनोदशा कैसे बदलती है इसे नीचे दुष्यंत कुकरेजा नामक एक यूटूबर के शॉर्ट रील या विडीयो क्लिप के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है। इस विडीयो से सम्बंधित सारी कापी राईट, प्रॉपर्टी क्लेम या डिजिटल उत्पाद दुष्यंत कुकरेजा और उनके यूटूब चैनल का है।